सीतामढ़ी। बेलसंड अनुमंडल मुख्यालय से लगभग 4 किलोमीटर की दूरी पर ईशानकोण में अवस्थित है बाबा ईशाननाथ मंदिर। यह सीतामढ़ी जिले के सर्वाधिक प्राचीन एवं प्रसिद्ध मंदिर है। लोहासी पंचायत के दमामी गांव में होने के कारण यह दमामी मठ के नाम से भी प्रसिद्ध है। इन्हें स्वयंभू महादेव व पातालेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर का इतिहास चिताभूमि पर अवस्थित इस मंदिर को रामायण काल से भी पुराना बताया जाता है। कहते हैं कि भगवान राम की बरात जनकपुर से वापस अयोध्या जाने के दौरान यहां रूकी थी। उस समय मंदिर के बगल से बागमती नदी बहती थी। जिसका अवशेष नासी के रूप में अब भी है। मंदिर के मुख्यद्वार पर स्थापित घंटा विक्रमसंवत 1200 में जलेश्वर धाम के महंत द्वारा स्थापित किया गया है। वर्तमान महंत की 29 वीं पीढ़ी मंदिर का देखरेख कर रही है।
सीतामढ़ी। बेलसंड अनुमंडल मुख्यालय से लगभग 4 किलोमीटर की दूरी पर ईशानकोण में अवस्थित है बाबा ईशाननाथ मंदिर। यह सीतामढ़ी जिले के सर्वाधिक प्राचीन एवं प्रसिद्ध मंदिर है। लोहासी पंचायत के दमामी गांव में होने के कारण यह दमामी मठ के नाम से भी प्रसिद्ध है। इन्हें स्वयंभू महादेव व पातालेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर का इतिहास चिताभूमि पर अवस्थित इस मंदिर को रामायण काल से भी पुराना बताया जाता है। कहते हैं कि भगवान राम की बरात जनकपुर से वापस अयोध्या जाने के दौरान यहां रूकी थी। उस समय मंदिर के बगल से बागमती नदी बहती थी। जिसका अवशेष नासी के रूप में अब भी है। मंदिर के मुख्यद्वार पर स्थापित घंटा विक्रमसंवत 1200 में जलेश्वर धाम के महंत द्वारा स्थापित किया गया है। वर्तमान महंत की 29 वीं पीढ़ी मंदिर का देखरेख कर रही है।

